निकोलस डार्वस ने सालों तक दूसरों की सलाह मानकर पैसे गँवाए। फिर उन्होंने ऐसा तरीका बनाया जो उनकी अपनी ज़िंदगी में फ़िट बैठता था। उनकी कहानी दिखाती है कि उधार का चश्मा उतारने पर क्या बदल जाता है।
निकोलस डार्वस हंगरी के एक डांसर थे। 1950 के दशक में वे अपनी सौतेली बहन जूलिया के साथ यूरोप और अमेरिका के थिएटरों और क्लबों में डांस करते थे। उन्हें शेयर बाज़ार का कोई अनुभव नहीं था।
1952 में टोरंटो के एक शो आयोजक ने उन्हें नकद के बदले एक छोटी कनाडाई माइनिंग कंपनी के 6000 शेयर देने की पेशकश की। शो नहीं हुआ, लेकिन अपनी साख बचाने के लिए डार्वस ने वे शेयर करीब 3000 डॉलर में खरीद लिए।
जल्द ही हर शेयर का दाम 50 सेंट से बढ़कर 1.90 डॉलर हो गया। डार्वस ने शेयर बेच दिए और 8000 डॉलर से ज़्यादा का मुनाफ़ा कमाया। इसी इत्तफ़ाक के मुनाफ़े ने उन्हें बाज़ार की ओर खींचा, लेकिन अगले कई साल नुकसान के साल रहे।
उधार के चश्मे के साल
शुरुआत में डार्वस उन अमीर लोगों की सलाह सुनते थे जिनसे वे अपने शो में मिलते थे। फिर उन्होंने निवेश सलाह वाले न्यूज़लेटर मँगवाने शुरू किए। वे बारटेंडरों और वेटरों से भी "हॉट स्टॉक" के नाम ले लेते थे।
सलाहें आपस में टकराती थीं। जब तक कोई टिप उन तक पहुँचती, टिप देने वाले अक्सर पहले ही बेच रहे होते थे। उन्होंने अपने पहले मुनाफ़े का करीब आधा हिस्सा गँवा दिया।
फिर वे वॉल स्ट्रीट के करीब रहने के लिए न्यूयॉर्क चले गए। उन्होंने अपने ब्रोकर, न्यूज़लेटरों और बाज़ार की अफ़वाहों की बात सुनी। उन्होंने कंपनियों के खाते भी पढ़े और फ़ंडामेंटल एनालिसिस के आधार पर खरीदा, लेकिन फिर से करीब 9000 डॉलर गँवा दिए।
उनकी किताब के अध्याय भी यही रास्ता दिखाते हैं: "कनाडा का दौर", "वॉल स्ट्रीट में कदम" और फिर "मेरा पहला संकट"। तब तक डार्वस दूसरों के चश्मे से बाज़ार देख रहे थे।
अपनी ज़िंदगी के हिसाब से बना तरीका
दूसरों की बात सुनने के बजाय डार्वस ने कीमतों के बर्ताव का अध्ययन किया। उन्होंने बाज़ार और सट्टेबाज़ों पर करीब 200 किताबें पढ़ीं, और कभी-कभी दिन में आठ घंटे तक पढ़ाई की।
उन्होंने देखा कि मज़बूत शेयर कुछ समय तक एक प्राइस रेंज के अंदर चलते हैं, और फिर भारी वॉल्यूम के साथ उससे बाहर निकल जाते हैं। उन्होंने इन रेंज को "बॉक्स" कहा।
उनका नियम सीधा था। जब कीमत बॉक्स को ऊपर की ओर तोड़ती, वे खरीद लेते। उसी समय वे खरीद के दाम से थोड़ा नीचे स्टॉप लॉस लगा देते। जब कीमत और ऊपर जाती, तो वे स्टॉप लॉस भी ऊपर कर देते।
बाद में उन्होंने अपने तरीके में कंपनियों के फ़ंडामेंटल्स भी जोड़ दिए। वे सिर्फ़ वही शेयर खरीदते जो चार्ट पर मज़बूत हों और जिनकी कंपनी की कमाई की संभावनाएँ अच्छी हों।
इस तरीके की सबसे अहम बात यह थी कि यह उनकी ज़िंदगी में फ़िट बैठता था। डार्वस हमेशा सफ़र में रहते थे और स्टॉक एक्सचेंज के बोर्ड के सामने नहीं बैठ सकते थे। इसलिए उन्होंने ऐसा तरीका बनाया जिसमें इसकी ज़रूरत ही न हो।
वे कीमतें टेलीग्राम से मँगवाते थे और न्यूयॉर्क में अपने ब्रोकर को ऑर्डर भी टेलीग्राम से भेजते थे। Barron's पत्रिका उन तक आम तौर पर एक हफ़्ते देर से पहुँचती थी। इसी दूरी ने उन्हें बाज़ार के रोज़ के शोर से दूर रखा।
इसी तरीके से उन्होंने अपने सफ़रों के दौरान करीब पाँच लाख डॉलर का मुनाफ़ा कमाया। उनकी किताब के एक अध्याय का नाम भी "दुनिया भर से टेलीग्राम" है।
दूसरा संकट: फिर से दूसरों का चश्मा
इस कामयाबी के बाद डार्वस न्यूयॉर्क लौट आए। उनका आत्मविश्वास ज़रूरत से ज़्यादा बढ़ गया था। वे फिर से भीड़ के पीछे चले और अफ़वाहें सुनने लगे।
नतीजा फिर एक भारी नुकसान रहा। वे भावनाओं में बहकर फ़ैसले लेने लगे, और उनका तरीका बिखर गया। कुछ समय के लिए उन्होंने न्यूयॉर्क छोड़ दिया।
फिर उन्होंने अपने लिए दो नए नियम बनाए। पहला नियम: अब कभी किसी ब्रोकर से आमने-सामने नहीं मिलना। दूसरा नियम: कीमतें सिर्फ़ तब देखना जब बाज़ार बंद हो।
नतीजा
डार्वस ने लिखा कि 1950 के दशक के आखिर में, करीब 18 महीनों में उन्होंने 20 लाख डॉलर से ज़्यादा कमाए। Time पत्रिका ने मई 1959 में उनकी कहानी छापी। दिसंबर 1960 तक उनकी किताब की करीब 1.2 लाख प्रतियाँ बिक चुकी थीं।
हमारे लिए इस कहानी की कीमत उनके रास्ते में है। एक डांसर जो दूसरों की सलाह पर पैसे गँवा रहा था, उसने अपने तरीके से पैसे कमाए।
डार्वस की कहानी से चार सबक
टिप्स दूसरों का चश्मा हैं। जब तक डार्वस दूसरों की बातों पर ट्रेड करते रहे, वे पैसे गँवाते रहे।
आपकी ज़िंदगी की कोई सीमा आपके तरीके की नींव बन सकती है। डार्वस बोर्ड के सामने नहीं बैठ सकते थे, इसलिए उन्होंने ऐसा तरीका बनाया जिसमें इसकी ज़रूरत नहीं थी।
आपका माहौल आपकी रणनीति का हिस्सा है। बाज़ार के शोर के करीब रहने से डार्वस अपनी पुरानी आदतों पर लौट आए।
डार्वस का तरीका भी बिना बदले कॉपी न करें। वह 1950 के दशक के अमेरिकी शेयरों और हमेशा सफ़र में रहने वाले एक डांसर की ज़िंदगी के लिए बना था। उनसे जो लेना है, वह उनका रास्ता है: खुद को पहचानना, अपने नियम लिखना और उन पर टिके रहना।
