ट्रेडिंग स्टाइल एक आसान सवाल से तय होती है: आप हर ट्रेड को कितने समय तक रखते हैं? यही एक चुनाव आपका टाइमफ्रेम, रोज़ का समय और आप पर पड़ने वाले दबाव का प्रकार तय करता है। इस पाठ में आप देखेंगे कि हर स्टाइल आपसे क्या माँगती है, ताकि आप जान सकें कि कौन-सी आपके दिन में फ़िट बैठती है।
स्टाइल और रणनीति एक चीज़ नहीं हैं। स्टाइल बताती है कि आप कितनी बार ट्रेड करते हैं और हर ट्रेड को कितने समय तक रखते हैं। रणनीति आपके एंट्री और एग्ज़िट के नियमों का सेट है।
| स्टाइल | एक ट्रेड कितनी देर रखा जाता है | आम टाइमफ्रेम | ज़रूरी समय | किसके लिए सही | मुख्य चुनौती |
|---|---|---|---|---|---|
| स्कैल्पर | कुछ सेकंड से कुछ मिनट | 1m और 5m | घंटों तक पूरा, बिना रुके ध्यान | जो जल्दी फ़ैसला लेता है और दबाव में शांत रहता है | ज़्यादा ट्रेडिंग खर्च और दिमागी थकान |
| डे ट्रेडर | कुछ मिनट से कुछ घंटे, सब दिन खत्म होने से पहले बंद | 5m से 1h | बाज़ार के सबसे व्यस्त घंटों में लगातार कुछ घंटे | जिसे रोज़ की दिनचर्या पसंद है और जो रात भर ट्रेड खुला नहीं रखना चाहता | ज़रूरत से ज़्यादा ट्रेड करने का लालच |
| स्विंग ट्रेडर | कुछ दिन से कुछ हफ़्ते | 4h और D | दिन में एक छोटी जाँच | जिसमें धैर्य है और जिसकी कोई दूसरी फ़ुल-टाइम नौकरी भी है | खुले ट्रेड को झेलना, और बाज़ार दोबारा खुलने पर कीमत में उछाल |
| पोज़िशनल ट्रेडर | कुछ हफ़्ते से कुछ महीने, कभी-कभी उससे भी ज़्यादा | D, W और M | हफ़्ते में एक जाँच | जिसकी सोच लंबी अवधि की है और जिसे पूरी अर्थव्यवस्था में दिलचस्पी है | ट्रेड के उलट बड़ी चालों को झेलना, और लंबा धैर्य |
स्कैल्पर को रोमांच और तेज़ फ़ैसले पसंद हैं। अगर चार्ट पर पाँच मिनट तक कुछ न हो, तो वह ऊब जाता है। हर ट्रेड का मुनाफ़ा छोटा होता है, इसलिए ट्रेडिंग खर्च और एक बड़ा नुकसान दर्जनों छोटे मुनाफ़े मिटा सकते हैं।
डे ट्रेडर को अनुशासन और संतुलन पसंद है। वह दिन में ही अपने ट्रेड खोलता और बंद करता है, और बिना किसी खुले ट्रेड के सोता है।
स्विंग ट्रेडर धैर्य वाला होता है। वह एक पूरी चाल के लिए कुछ दिनों से लेकर कुछ हफ़्तों तक इंतज़ार करने को तैयार रहता है। यह स्टाइल आम तौर पर फ़ुल-टाइम नौकरी के साथ चल जाती है।
पोज़िशनल ट्रेडर की नज़र बड़ी और लंबी अवधि की होती है। वह रोज़ के उतार-चढ़ाव को नज़रअंदाज़ करता है और बड़े ट्रेंड पर ध्यान देता है।
समय अवधि के अलावा दो और विकल्प
नियम या अपना विवेक?
कुछ ट्रेडर पहले से लिखे सटीक नियमों के साथ ज़्यादा शांत रहते हैं। वे हर शर्त को एक संख्या में बदल देते हैं और तभी एंट्री लेते हैं जब सारी शर्तें पूरी हों।
दूसरे ट्रेडर बाज़ार के बर्ताव को पढ़कर और अपने अनुभव के सहारे बेहतर फ़ैसले लेते हैं। दोनों तरह के लोगों में सफल ट्रेडर हैं।
मार्क फ़ेंटन-ओक्रीवी और उनके साथियों ने लंदन के चार इन्वेस्टमेंट बैंकों के ट्रेडरों का अध्ययन किया। ज़्यादा सफल और कम सफल ट्रेडरों में फ़र्क इस बात का था कि वे अपनी अंदरूनी समझ के साथ कैसे काम करते थे।
उनकी एक और खोज भी अहम है। जो ट्रेडर भावनाओं के हावी होने से पहले ही उन्हें संभाल लेते थे, उनके नतीजे उन ट्रेडरों से बेहतर रहे जो भावना पैदा होने के बाद ही उससे लड़ते थे। ट्रेड से पहले अपने नियम लिख लेना भावनाओं को पहले से संभालने का सबसे आसान तरीका है।
अगर आप अपने विवेक से ट्रेड करते हैं, तब भी आपको कुछ पक्के नियम चाहिए: एक स्टॉप लॉस के लिए और एक पोज़िशन साइज़ के लिए। अंदरूनी समझ एंट्री चुनने में मदद करती है, और नियम बड़े नुकसान को रोकते हैं।
टेक्निकल, फ़ंडामेंटल या दोनों?
टेक्निकल एनालिसिस कीमत के बर्ताव और चार्ट पर ध्यान देता है। फ़ंडामेंटल एनालिसिस अर्थव्यवस्था, खबरों और एसेट की वैल्यू पर ध्यान देता है। सालों तक आज़माने और गलतियाँ करने के बाद डार्वस ने दोनों का मेल बनाया।
अगर आपको खबरें और आर्थिक रिपोर्ट पढ़ना अच्छा लगता है, तो फ़ंडामेंटल या मिला-जुला तरीका शायद आपको ज़्यादा स्वाभाविक लगेगा। अगर सिर्फ़ चार्ट ही आपको रोमांचित करता है, तो टेक्निकल एनालिसिस आपकी जगह है।
